इस कार्यक्रम में पंडित सुभ्रता डे (प्रसिद्ध सितार वादक), पंडित सिद्धार्थ चटर्जी (प्रसिद्ध तबला वादक) श्री शांतम टंडन(उभरते युवा गायक), श्री राजेंद्र गुरु और पूर्व छात्रा रितु प्रमुख वाद्य वादक रहे। कार्यशाला का विषय रहा :- परंपरा, अभिव्यक्ति,विकास। जिसका प्रमुख उद्देश्य हिंदुस्तानी संगीत के शाश्वत यात्रा का पोषण करना रहा। सभी भारतीय शास्त्रीय संगीतज्ञ महानुभावों ने अपने-अपने वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति द्वारा संपूर्ण सभागार को संगीतमय बना दिया। इन संगीतज्ञों की गायन-वादन जुगलबंदी से सभी श्रोतागण झूम उठे और संपूर्ण सभागार तालियों से गूंज उठा।
